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Sunday, 8 March 2015

Globalisation and Liberalisation

उदारीकरण/वैश्वीकरण (Globalisation and Liberalisation)


         उदारीकरण का अर्थ उन सभी नीतियो को बनाने से है जिनके द्वारा किसी दो के आर्थिक एंव औधोगिक विकास मे बाधक नियमों, विनियमों कानूनो एवं प्रशासकीय नियन्त्रणों को समाप्त या ढीला किया जाता है, सहायक नीतियां तथा नियमो को अपनाया जाता है। यह विकास का एक मध्यम मार्ग है क्योकि इससे अनेक जरूरतो से धन की व्यवस्था की जाती है। इसलिये इसे विकास का बार्इपास माडल उदारीकरण भी कहते है।



उदारीकरण(आर्थिक सुधार के प्रभाव)-

उदारीकरण नीति ने भारत की कृषि उधोग एवं व्यापार विकास पर कर्इ सुप्रभाव एवं दुष्प्रभाव डाले है, जिन्हे अध्ययन की सुविधा हेतु तीन भागो मे विभाजित करते है ।
1. कृषि के विकास पर प्रभाव। 2. उधोगो के विकास पर प्रभाव।

    ऐ.)कृषि के विकास पर अच्छा प्रभाव

1. कृषि विकास की दर मे वृद्धि। 2. कृषि निर्यातांें मे वृद्धि। 3. खाधान्न उत्पादन मे वृद्धि। 4. निजी क्षेत्र की भूमिका। 5. दुग्ध उत्पादन एवं प्रति व्यकित उपलब्धता मे वृद्धि। 6. विभिन्न फसलो के सिचिंत क्षेत्र मे वृद्धि। 7. घरेलू कृषि बाजार मे उदारीकरण। 8. किसानो को अपनी मेहनत एवं विनियोग के अनुरूप न केवल उपज की कीमत मिल पायेगी अपितू कृषि आय मे नियामन एवं नियंत्रण अधिकता भी समाप्त हो जायेगी।
9. प्रमुख फसलोे की प्रति हैक्टेयर उपज मे वृद्धि। खाधान्न, चावल अनाज, दाल आदि 10. उर्वरको के उत्पादन एवं उपभोग मे वृद्वि। 11. कृषि उत्पादन सूचकांक मे वृद्धि।

    बी.)कृषि विकास पर दुष्प्रभाव या बुरा प्रभाव-

1. जीडीपी कृषि क्षेत्र के पूंजी निर्माण में कमी। 2. कुल आदानो एंव लागत मे वृद्धि। 3. अनेक फसलो की प्रति हैक्टेयर उपज मे कमी। 4. दलो, तिलहन, एवं रेशे वाली फसलो के उत्पादन सूचकाक मे गिरावट। 5. निर्यातो मे कृषि क्षेत्र के प्रतिशत भाग मे कमी। 6. खाध तेलों के उत्पादन बढ़ाने मे असफलता।

उधोगो के विकास पर प्रभाव-

    ऐ) उधोगो के विकास पर सुप्रभाव या अच्छा प्रभाव।

     1. जी डी पी एवं औधोगिक विकास दर मे वृद्धि। 
     2. सर्वोतम तकनको का आयात। 
     3. विदेशी पूंजी निवेशो मे वृद्धि। 
     4. विदेशी मुद्रा भण्डार मे वृद्धि। 
     5. नये उधमी वर्ग का प्रादुर्भाव। 
     6. विदेशी ऋणभार मे कमी।
     7. उत्पादन मे वृद्धि। 
     8. प्रतिस्पद्र्धाओ का प्रारम्भ।
       

बी.) उधोगो के विकास पर दुष्प्रभाव या बुरा प्रभाव।

     1. हानि की अधिकता। 
     2. कठोर प्रतिस्पद्र्धा। 
     3. बेरोजगारी मे वृद्धि। 
     4. सार्वजनिक क्षेत्रो का हतोत्साहित होना। 
     5. निर्यातो मे अपेक्षित वृद्धि। 
     6. विदेशी हस्तक्षेप मे वृद्धि। 
     7. स्वदेशी एवं लघु उधोगो केा हानि।
     8. श्रम संघो का विराध।

    वैश्वीकरणभुमण्डलीकरण का अर्थ किसी देश की अर्थव्यवस्थ को अन्य देश की अर्थव्यवस्थओं के साथ जोड़ने एवं उनके समक्ष प्रतिस्पद्र्धा क्षमता का विकास करने से है अन्य शब्दो मे किसी एक अर्थव्यवस्था का विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ समन्वय करने को वैश्वीकरण कहा जाता है।

ऐ.) वैश्वीकरण के लाभ- 

     1. विश्वव्यापी बाजार।  
     2. किस्म एवं गुणवता मे सुधार। 
     3. वृहद आकार। 
     4. सेवाओ के स्तर मे सुधार। 
     5. उत्पादन क्षमता का स्वतन्त्र निर्धारण। 
     6. प्रौधोगिकी मे सुधार। 
     7. अनेक विपणन श्रेष्ठतायें। 
     8. श्रम सम्बन्धो मे सुधार। 
     9. विस्तृत पूंजी बाजार। 
     10. वातावरण के प्रति सजगता। 
     11. नये-2 उधोागो की स्थापना। 
     12. आधारभूत ढ़ाचे का विकास। 
     13. सामाजिक सहयोग एवं समस्या का हल। 
     14. सामाजिक क्षेत्र मे भारी विनियोग। 
     15. भुगतान संतुलन मे सुधार। 
     16. प्रतिभा पलायन पर रोक। 
     17. बचत एवं विनियोग मे वृद्धि। 
     18. जीवन स्तर मे सुधार।  
     19. अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग। 
     20. जीवन किस्म मे सुधार।

बी.) वैश्वीकरण की हानियां- 
     1. गलाकाट प्रतिस्पद्र्धा। 
     2. सरक्षणो की समापित। 
     3. अनुपयुक्त वस्तुओ का उत्पादन। 
     4. आर्थिक एकाधिकार। 
     5. लघु एवं कुटीर उधोगो के असितत्व को खतरा। 
     6. बाहरी संस्थाओ का अधिपत्य। 
     7. घरेलू उधागो को धक्का।  
     8. आयात महगे होना।  
     9. दैनिक जीवन की वस्तुयेें महंगी।  
     10. असन्तुलित विकास।  
     11. गरीबी का हल नही। 
     12. आर्थिक विकास प्रभावित होना।  
     13. राजनीतिक हस्तक्षेप।  
     14. बेराजगारी मे वृद्धि। 
     15. योजनाओ की प्राथमिकतायें प्रभावित। 
     16. असमानताओ मे वृद्धि। 
     17. रूपये का अवमूल्यन। 
     18. राष्ट्रीय सम्प्रभुता को खतरा।



आपके सुझाव एवं प्रतिक्रिया कमेंट्स बॉक्स में आमंत्रित हैं।

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