Industrial Growth and Prospects in India

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भारत मे औधोगिक विकास एंव संभावनायें

(Industrial Growth and Prospects in India)


भारत की पंचवर्षीय योजनाओ मे औधोगिक विकास को इस प्रकार बताया जा सकता है (1951-56)।
पहली पंचवर्षीय योजना- औधोगिक विकास विशेष नही रहा। 1954 मे औधोगिक विकास निगम 1955 मे भारतीय औधोगिक साख एंव विनियोग निगम की स्थापना की गयी। औधोगिक उत्पादन 7 प्रतिशत प्रतिवर्ष से बढ़ा।
दूसरी पंचवर्षीय योजना(1956-61)-  उधोग प्रधान सार्वजनिक क्षेत्र मे संगठित उधोग पर 870 करोड़ विनियोग, राष्ट्रीय महत्व के उधोगो का राष्ट्रीयकरण ग्राम तथा लघु उधोगो का राष्ट्रीयकरण ग्राम तथा लघु उधोगों का विकास।

तीसरी पंचवर्षीय योजना(1961-66)-  पूंजी तथा उत्पादक वस्तुओं का विस्तार, योजना काल मे राउरकरकेला, भिलार्इ एवं दुर्गापुर इस्पात संयत्राें की उत्पादन क्षमता मे वृद्धि की गयी। 1964 मे औधोगिक विकास बैक की स्थापना, तृतीय योजना औधोगिक क्षेत्र में असफल रही। औधोगिक उत्पादन 7.6 प्रतिशत बढा, लक्ष्य 14 प्रतिशत था।
चौथी पंचवर्षीय योजना(1969-74)-  इस योजना मे औधोगिक विकास की गिरावट का मुख्य कारण निजी क्षेत्र पर विनियोग विस्तार संबंधी नियंत्रण थे। इस योजना मे सरकार ने मिश्रित क्षे़त्र के नाम से औधोगिक घराने और विदेशी कम्पनियो को भारी विनियोग के क्षेत्र के नाम से औधोगिक घरानो और विदेशी कम्पनियों को भारी विनियोग के क्षेत्र मे कार्य करने की अनुमति प्रदान की गर्इ।
पांचवी पंचवर्षीय योजना- इस योजना मे आत्मनिर्भरता एंव सामाजिक न्याय के लक्ष्य को ध्यान मे रखते हुये औधोगिक विकास की व्यूहरचना तैयार की गयी।
छठी पंचवर्षीय योंजना- इस योजना की समग्र विकास रणनीति संरचनात्मक परिर्वतन आधुनिकीकरण एंव आत्मर्निभरता के लक्ष्यो को ध्यान मे रखते हुये तैयार की गर्इ (1985-90) 5.5 प्रतिशत।
सातवीं पंचवर्षीय योजना- इस योजना का मुख्य उददेश्य सामाजिक न्याय के साथ विकास और उत्पादकता उन्नत करना था। औधोगिक उत्पादन की दृषिट से थे योजना सफल रही। 8.7 प्रतिशत रही है।
आठवी पंचवर्षीय योजना (1992-97)- 1991 मे औधोगिक नीति मे उदारीकरण एवं वैश्वीकरण पर अधिक जोर दिया गया। दिया परिणामस्वरूप लाइसेन्स व्यवस्था एक तरह से समाप्त कर दी गयी तथा आर्थिक विकास मे निजी क्षेत्र को ज्यादा महत्व दिया गया।
नौवी पंचवर्षीय योजना-(1997-2002)- कुल मिलाकर इस योजना मे विनिर्माण क्षेत्र में उपलबिध 3.9 प्रतिशत रही जबकि इसका लक्ष्य 8.2 प्रतिशत था।
दसवीं पंचवर्षीय योजना-(2002-07)-  2004-05 मे 18.6 प्रतिशत वृद्धि रिकार्ड की, वस्त्र उत्पादन, तम्बाकू 25.8 प्रतिशत, खाध 10 प्रतिशत।

भारत मे औधोगिक विकास की संभावना वाले उधोग -

वस्त्र उधोग- ऐसे उधोग श्रमिकों की जरूरत ज्यादा2006-07 मे 28.6 प्रतिशत की अत्याधिक वृद्धि प्रदर्शित की गर्इ। वस्त्रों के निर्यात की प्रोत्साहन देने के लिये बंगलौर, लुधियाना, कांचीपुरम, सुरत, तिरूअनन्तपुरम, तिरूपर, सनिका सिटी कानपुर एंव विशाखपटटनम मे 9 परिधान पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया।

भवन निर्माण- राष्ट्रीय आवास एव पर्यावास नीति 1998 का उददेश्य प्रत्येक वर्ष दो मिलियन आवासीय एक को निर्माण करना है। देश मे 30,810 प्राथमिक आवास सहकारी सीमतियां कार्य कर रही है।
पर्यटन - निर्यातोन्मुखी सेवा क्षेत्र है जिसमे विशेष रूप से अकुशल एंव अद्र्धकुशल श्रमिक के लिये रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की क्षमता विधमान है।
रत्न एंव आभुषण उधोग- यहां विदेश से कच्चा माल आता है। यह एक दिलचस्प उधोग है क्योकि इसमे आयातित कच्चा माल, घरेलू मूल्यवर्धन और वैशिवक बाजार शामिल है तथा कुशल श्रम को रोजगार उपलब्ध कराता है भारतीय रत्न फर्म वेशिवक उत्पादन श्रृखंला से गहरे से जुड़े है।
दूरसंचार उधोग - यह उधोग विकासशील उधोग है। आज यह उधोग वैश्वीकृत प्रतियोगिता मे सफलता प्राप्त कर रहा है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत की गर्इ दूरसंचार उपकरण विनिर्माण और सूचना प्रौधोगिकी समर्थित सेवाओ की व्यवस्था के क्षेत्र मे 100 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गर्इ।
इलेक्ट्रोनिक्स एवं कम्प्यूटर प्राधोगिकी उधोग- साफटवेयर निर्यात भारत के निर्यात व्यापार में वृद्वि।
खाध प्रसंस्करण उधोग- प्रसंस्करण उधोग के विकास की बहुत अधिक संभावना है। सरकार ने इस दिशा मे अनेक उपाय, खाध प्रसंस्करण उधोग मंत्रालय ने देश के विभिन्न भागाें मे फूड पाकर्स की स्थापना के कार्य किये है जो शीत भंडारण, भण्डागार गुणवता नियत्रण, प्रयोगशालाओ एवं मल-जल शोधन संयंत्रो आदि के क्षेत्र की फर्मो को प्रोत्साहन देते हैं। अभी तक देश मे 36 फूड पाकर्स स्वीकृत किये गये है खाध प्रसंस्करण उधोग मंत्रालय खुदरा बिक्री के लिये बार कोडिग को भी बढ़ावा देने पर कार्य कर रहा है।

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