Population Explosion

rakesh1

जनसंख्या विस्फोट (Population Explosion)


    वर्ष 2011 मे भारत की जनसंख्या बढकर 121.02 करोड़ हो गर्इ। विश्व मे पैदा होने वाला हर छठा बच्चा भारतीय है। हर 1-12 सैकेण्ड मे एक बच्चा भारतीय धरती पर आता है। 20 वी सदी मे भारत की जनसंख्या वृद्धि को चार प्रमुख अवस्थाओं मे बांटा जा सकता है।
    प्रथम (1901-1921) सिथर जनंसख्या
    द्वितिय(1921-1957) क्रमिक वृद्धि
    तृतीय (1958-1981) तेजी से वृद्धि
    चतुर्थ (1981-2011) कमी के लक्षण के साथ उंची वृद्धि

प्रथम अवस्था (1901-1921)- इस अवस्था मे जनसंख्या वृद्धि की दर कम होती है क्योकि जन्म एंव मृत्यु दर दोनाें उंची होती हैं अथवा बराबर होती है।
द्वितिय अवस्था (1921-1951)- इस अवस्था मे जन्म दर उंची रहती है एवं मृत्यु दर मे तीव्र गिरावट आने लगती है। इसी कारण जनसंख्या वृद्धि की गति बढ़ जाती है। इस कारण परिवार का औसत आकार बड़ा हो जाता है। मृत्यु दर मे कमी का मुख्य कारण महामारियां अर्थात प्लेग, चेचक, हैजा, आदि पर नियंत्रण करना था।
तृतीय अवस्था (1951-1981)- इस अवस्था मे जनसंख्या मे 32.2 करोड़ की रिकार्ड वृद्धि हुर्इ है। इसी अवधि मे जनसंख्या विस्फोट हुआ इस काल मे मृत्यु दर पर नियंत्रण किया गया। जो घटकर 15 प्रति हजार हो गयी। परन्तु जन्म दर उंची 40 प्रति हजार के स्तर पर बनी रही।
चतुर्थ अवस्था (1981-2011)- चौथी अवस्था मे मृत्यु दर एवं जन्म दर निम्न स्तर पर संतुलित हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या वृद्धि की दर भी कम हो जाती है। भारत मे इन 20 वर्षो मे जनसंख्या 1981 मे 68.6 करोड़ थी जो 2001 मे बढ़कर 102.7 करोड़ हो गयी जो पिछले 20 वर्षो की अवधि मे 50 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।
    1901-1911--जन्म दर 48.011000    मृत्यु दर 42.6
    2001-2011--जन्म दर 22.21000    मृत्यु दर 6.4

जनसंख्या की विस्फोटक सिथति के कारण -

1 प्राकृतिक कारण -उंची जन्म दर, नीची मृत्यु दर। 
2.प्रवास प्रोत्साहन
उंची मृत्यु दर-
      1. सित्रयों की विवाह की आयु। 
      2. जनन क्षमता मे वृद्धि की अवधि। 
      3. परिवार मे वृद्धि की गति (परिवार मे वृद्धि कर्इ कारणों से अच्छी मानी जाती है। धार्मिक अंधविश्वास, अशिक्षा, सांमाजिक पिछड़ापन, सामाजिक सुरक्षा का अभाव आदि।) 
      4. जनसंख्या एंव अनुत्पादक उपभोक्ता अपने पालन पोषण के लिये दूसरों पर निर्भर है जैसे बच्चे, बूढ़े, बेरोजगार आदि।

अच्छे परिणाम- -श्रमिक ज्यादा। बड़ा बाजार। निवेश के लिये प्रेरणादायक। विदोहन को अनुकूलतम करना।
कृषि विकास। उधोग विकास। ज्यादा श्रमिकों वाले काम ज्यादा करेंगें।   

2. नीची मृत्यु दर -1. अकाल एंव महामरियों पर नियत्रंण। 2. उच्च जीवन स्तर। 3. स्वास्थय सुविधाओं का विस्तार  4. शिक्षा का प्रसार 5. शिशु मृत्यु दर मे गिरावट  6. निशिचत खाना।

जनसंख्या विस्फोट के प्रभाव-

1. दुष्परिणाम -जनसंख्या एंव भूमि संसाधन घनत्व में वृद्वि। प्रति व्यकित आय एवं आय मे कम वृद्धि। जनसंख्या एवं खाधान्नो की उपलबिध को हथियाना। एक अनुमान के अनुसार 2020 तक देश मे कृषि योग्य भूमि की उपलब्धता 17 करोड़ हैक्टेयर से घटकर 10 करोड़ हैक्टेयर रह जायेगी तथा खाधान्न की आवश्यकता 20 करोड़ टन से बढकर 30 करोड़ रह जायेगी। 414 ग्राम खाधान्न प्रति व्यकित प्रति दिन। कुपोषण। जनसंख्या एवं गरीबी (गरीबी हटाओ, गरीबों को नहीं)। जनसंख्या एवं पूंजी निर्माण। 
प्रति व्यकित वास्तविक आय के विधमान स्तर को बनाये रखने के लिये यह आवश्यक है कि राष्ट्रीय आय मे उस दर से वृद्धि हो जिस दर से जनसंख्या मे वृद्धि हो रही है। भारत मे जनसंख्या वृद्धि दर वर्तमान मे 1.9 है। यानि राष्ट्रीय आय मे 1.9 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिये। भारत मे ब्ंचपजंस व्नतचनज 4.1 है यानि एक र्इकार्इ बनाने के लिये 4.1 पूंजी की जरूरत होती है इस हिसाब से हमे कुल 1-9 x 4-1 = 7.8: हर साल पूंजी चाहियें। वैसे यह दर 40.0 प्रतिशत से उपर होनी चाहिये। वर्तमान में  हमारी दर 36.5 प्रतिशत हैं।

जनसंख्या की विस्फोटक सिथति पर नियंत्रण के उपाय-

  • शिक्षा प्रसार (कम बच्चे)। 
  • परिवार नियोजन की कानूनी अनिर्वायता। 
  • विवाह योग्य आयु मे वृद्धि (2118 कम आयु है)। 
  • प्रवास प्रोत्साहन। प्रवास अधिकतर खाली स्थानों पर किया जाये। 
  • अन्तर्राष्ट्रीय संस्था द्वारा नियोजित ढ़ग से हो। 
  • जो व्यकित जिस देश मे जाकर बसे उस देश की राष्ट्रीयता अपना ले। 
  • तीव्र अधिक विकास। सामाजिक सुरक्षा। 
  • विवेकहीन मातृत्व पर रोक। 
  • कानूनों की कड़ार्इ से पालना (शारदा ऐक्ट-बाल विवाह)। 
  • मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करना। घुसपैठ पर प्रभावी नियंत्रण।


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