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Saturday, 7 March 2015

Salient Features of Indian Economy

भारतीय अर्थव्यवस्था - आधारभूत विशेषता  एवं समस्यायें

(Salient Features of Indian Economy)


अर्थषास्त्र- सामाजिक विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तगर्त वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण एवं
उपभोग का अध्ययन किया जाता है, अर्थषास्त्र कहलाता है। अर्थव्यवस्था- सम्पूर्ण संसाधन एवं धन जो कि एक
क्षेत्रीय सीमा में होता है, वह वहां की अर्थव्यवस्था कहलाता है। जैसे भारत के क्षेत्र भारत हुआ तो भारतीय
अर्थव्यवस्था।

विशेषताये (एवं समस्यायें)

1. विष्व की विषालतम अर्थव्यवस्था (क्षेत्र फल 32,87,263, वर्ग कि.मी. उतर से दक्षिण तक 3214 कि.मी., पूर्व
से पष्चिम तक 2,933 कि.मी. समुद्रतट की लम्बाई 6,100 कि.मी., उतर मे हिमालय, दक्षिण के तीनो ओर से
समुद्र से घिरा।
2. राष्ट्रीय आय- इसकी दो प्रमुख अवधारणाऐ है। अ-सकल घरेलू उत्पाद ब- सकल राष्ट्रीय उत्पाद
2011-2012 मे सकल घरेलू 89,12,178 करोड़ रूपये था। हमारा वार्षिक विकास - अन्य राष्ट्रो की तुलना मे
हमारी आय बहुत कम है।
3. नियोजित एवं विकासषील मिश्रित अर्थव्यवस्था (समाजवाद और पूंजीवाद) नियोजित अर्थव्यस्था जहां हम
पंचवर्षीय योजना बनाते है। विकासषील क्यांेकि हमारा जीवन स्तर, तुलनात्मक रूप से निम्नं स्तर का है।
समाजवाद का अर्थ है कि हमारी अर्थव्यवस्था में सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र एवं पूंजी वाद का समन्वय है।
4. प्रति व्यक्ति आय का निम्न स्तर-5729 चालू मूल्यों पर मासिक प्रति व्यक्ति आयत्र राष्ट्रीय आय
जनसंख्या
5. औसत भारतीय का निम्न जीवन स्तर (असन्तुलित भोजन, भारतीय भोजन का अनाज प्रधान होना) जहां
अधिकर देषो में खाद्य का औसत 3400 कैलोरी से अधिक है। भारत में 2415 कैलोरी है जो आवष्यक 2100
कैलोरी से थोडा सा ही अधिक है।
6. विकास दर में गिरावट
7. जनसंख्या की विस्फोटक वृद्धि- भारत मे विष्व की 17.2 प्रतिषत जनंसख्या हे किन्तु क्षेत्रफल 2.4 प्रतिषत
ही है। भारत का जनंसख्या मे विष्व का दूसरा स्थान है। जनंसख्या में वार्षिक वृद्धि 1.93 प्रतिषत है। 2011 मे
भारत की जनसंख्या 121 करोड़ थी।
8. कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था - कृषि मे हमारी श्रम शक्ति का 64 प्रतिषत भाग आजीविका प्राप्त कर रहा है।
इसके बावजूद विभिन्न फसलांे की उत्पादकता कम है। 1/3 भाग मंे ही सिंचाई होती है।
9. आर्थिक विषमतायें - भारत मे आय एवं सम्पति के वितरण मे भारी असमानता है। धन के वितरण मे
असमानता, आय की असमानता से ज्यादा गहरी है।
10. सम्पन्नता मे गरीबी - एक व्यक्ति गरीब है क्योकि वह पहले से गरीब है। निर्धनता, निर्धनता का करण
एवं परिणााम दोनों है। गरीबी प्रतिषत के मामले मे बिहार 533 प्रतिषत के साथ सबसे अधिक गरीब राज्य है।
अंतराष्ट्रीय गरीब व्यक्ति वह है जो प्रतिदिन 1.5 डाॅलर से कम कमा पाता है। विष्व के 33 प्रतिषत गरीब लोग
भारत मे है भारत में 32.7 प्रतिषत जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है।
11. निर्बल आर्थिक संगठन आर्थिक विकास के लिये कुछ संस्थायें प्र्याप्त रूप मे विकसित नही हुई है।
क्वूदसवंक डवतम ब्वदजंदज टपेपज रू ूूूण्तचेबहनतनण्पद
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12. उपभोग के सामाजिक एवं आर्थिक सूचक- प्रति व्यक्ति कैलारी उपभोग, प्रति हजार जनंसंख्या के लिये
डाॅक्टर, मोटर गाडिया, टेलीफोन मानव विकास सूचंकाक मे भारत का स्थान 136वां है।
13. बेरोजगारी एवं अल्प बेरोजगारी की विद्यमानता-
14. प्रादेषिक आर्थिक विषमातांये - कुछ राज्य प्राकृतिक व आर्थिक दृष्टि से विकसित है, वह कुछ नही है।
15. औद्योगिक पिछड़ापन एंव असन्तुलित विकास - उद्योगों से राष्ट्रीय आय में छः प्रतिषत भाग प्राप्त होता
है एवं 15 प्रतिषत जनंसख्या को रोजगार प्राप्त होता है। असन्तुलित विकास जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक,
आदि राज्य तेज गति से बढ़ रहे है जबकि बिहार, उड़ीसा, उतरप्रदेष नही आदि।
16. असन्तुलित विदेषी व्यापार - हमारे आयात निर्यात मे ज्यादा रहते है।
17. निम्न स्तर की तकनीक - अधिकांष तकनीक महंगी है, पूंजी का अभाव, कुषल श्रमिको की कमी।
18. विदेषी ऋण एवं सहायता भार-
19. अर्थव्यवस्था की दोहरी प्रवृति - एक ओर अर्थव्यवस्था का ग्रामीण क्षेत्र पिछड़ा, रूढ़िवादी, अनपढ़ दूसरी
ओर छोटे-2 शहरी क्षेत्र विकसित, समृद्ध षिक्षित।
20. सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों मे विनिवेष- सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों मे विनिवेष की प्रक्रिया 1991-92 से
शुरू हुई, फिर भी हम लक्ष्यों को प्राप्त नही कर सके ओैर जिन लक्ष्यों को प्राप्त किया वह भी विवादास्पद बने
रहे।
21. वैष्वीकरण एंव उदारीकरण की नीतियां
22. पूंजी निर्माण की धीमी गति - आर्थिक धीमी गति, आर्थिक दरिद्रता एवं निम्न आय के कारण
अर्थव्यवस्था मे बचतो एंव विनियोग का स्तर नीचा है। भारत मे यह दर 24 प्रतिषत है।
23. घाटे की अर्थव्यवस्था - राजस्व व्यय बढ़ने के कारण केन्द्रीय सरकार का राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा
एवं प्राथमिक घाटा निरन्तर बढ़ रहा है।
आर्थिक नीति-
आर्थिक नीति शब्द का प्रयोग आर्थिक क्षेत्र मे सरकार की उन सभी क्रियाओ मे सम्मिलित
किया जा सकता है, जिनका सम्बन्ध उत्पादन, वितरण एवं उपयोग मे जानबूझकर अथवा अधिक सरकारी
हस्तक्षेप से होता है।
आर्थिक नीति के उद्देष्यः-
1. आर्थिक विकास एवं दर मे वृद्धि करना।
2. नियोजित विकास एवं प्रक्रिया पर बल देना।
3. देष मे आर्थिक संकेन्द्रण को कम करना।
4. सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र मे समन्वय स्थापित करना।
5. आर्थिक दृष्टि से कमजोर एवं पिछड़े लोगों की प्रगति पर ध्यान देना।
6. देष मे औद्योगिक विकास की गति को तेज करना।
7. तेजी से कृषि विकास करना।
8. पूर्ण रोजगार की स्थिति प्राप्त करना।
9. देष में आर्थिक स्थिरता बनायें रखना।
10. विदोहन को अनुकूलतम करना।
11. आधारभूत सुविधाओं का विकास।
12. देष के नागरिकों का अधिकतम सामाजिक कल्याण करना।
क्वूदसवंक डवतम ब्वदजंदज टपेपज रू ूूूण्तचेबहनतनण्पद
क्वूदसवंक डवतम ब्वदजंदज टपेपज रू ूूूण्तचेबहनतनण्पद
भारत की आर्थिक नीति में सुधार,- जुलाई 1991 में औद्योगिक नीति बनाई गयी। इसके बाद कोई नीति
नही बनाई गयी बल्कि इसी मे ही सुधार किया गया था।
नवीन अर्थिक नीति - इसके अन्तर्गत पांच औद्योगिक क्षेत्रो केा छोड़कर लाईसेंस पूर्णतया समाप्त कर दिया
गया।
पांच उद्योग निम्न है-
1. शराब 2. सिगरेट तम्बाकू 3. औद्योगिक विस्फोटक 4. खतरनाक रसायन 5. इलेक्ट्रोनिक्स, वायुयान, रक्षा
उपकरण।
लघु क्षेत्र- लघु क्षेत्र में आरक्षण व्यवस्था की समाप्ति की प्रक्रिया चालू हो गयी है।
 चर्म वस्तुयें जैसे जूता और खिलौना से सम्बन्धित 14 वस्तुओ को आरक्षित सूची मे डाल दिया।
 35 उच्च प्राथमिकता वाले उद्योगो की संख्या बढ़ाकर 48 कर दी गयी।
 सरकार ने एम. आर. टी. पी. एक्ट के स्थान पर प्रतिस्पर्धा अधिनियम बनाया है।
 सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के अंष बेचने के लिये विनिवेष का सहारा लिया गया है। (निजीकरण के
कारण)
 निरंतर घाटे मे चलने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयो के लिये बहिर्गमन नीति (म्गपज च्वसपबल)
बनाये जाने पर बल दिया गया है।
राजकोषीय नीति मे सुधार- (थ्पेबंस च्वसपबल) कर नीति, व्यय नीति एवं सार्वजनिक नीति।
भारतीय कर प्रणाली को सरल एवं युक्ति संगत एवं व्यापक आधार वाली बनाया गया। करदाता की
सुविधा के लिये सरल फार्म भी जारी किया गया। उत्पाद शुल्क एंव सीमा शुल्क की दरों को भी निरन्तर कम
एवं प्रतिस्पद्र्धात्मक बनाया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा रिजर्व बैंक ने चयनित प्रकार की साख के ऋण लेने पर
प्रतिबंन्ध लगााने एवं ऋण की अधिकतम सीमा निर्धारित किये जाने का उल्लेख किया गया है।
विदेषी व्यापार नीति में सुधार-
सीमा शुल्क को धीरे-2 कम करने की नीति एवं दरो की संख्या को भी 5 तक सीमित कर दिया गया।
निर्यात संवर्द्धन के अन्तर्गत कृषि एंव सम्बद्ध क्षेत्रो के लिये निर्यातोन्मुख इकाइयों की स्थापना। उपभोक्ता एवं
कृषि प्रधान वस्तुयें जिन पर कि मात्रात्मक प्रतिबंध समाप्त किये गये। निर्यात सम्बन्धित आधारभूत सुविधाओं के
विकास हेतु राज्यो के लिये विषेष सहायता। शत प्रतिषत विदेषी प्रत्यक्ष विनियोग को ई काॅमर्स, तेल शोधक,
विषेष आर्थिक क्षेत्र मे स्थापित ईकाइयों के लिये अनुमति प्रदान की गई है। खुदरा व्यापार में 100 प्रतिषत एफडी.
आई (थ्वतमपहद क्पतमबज प्दअमेजउमदज) है। टेलीकम्यूनिकेषन मे 100 प्रतिषत विदेषी पूंजी विनियोग किया
गया जा सकेगा ंवितीय एंव बैंकिग क्षेत्र मे नीतिगत सुधार। राष्ट्रीयकृत बैंक मे सरकार की अंशधारिता 33
प्रतिशत तक सीमित कर दी गई। निजी क्षेत्र में बैको के प्रबंध के लिये संशोधित नियम बनायें गये। समेकित
पर्यवेक्षण सार व सूचना ब्यूरो का प्रस्ताव रखा गया। ।ण्ब्ण्।ण् की वसूली की व्यवस्था की गई। राष्ट्रीयकृत
बैंको के बीमा एवं पूंजी बाजार क्षेत्र मे प्रवेश से सम्बन्धित निर्णय लिये गये। बीमा नियमन प्राधिकरण बिल पारित
किया गया जिससे निजी क्षेत्र का बीमा क्षेत्र मे प्रवेश का रास्ता खुल गया है। सामान्य ऋण 90 दिन से ज्यादा
व कृषि उत्पाद हेतू ऋण 180 दिन से ज्यादा का विलम्ब होने पर उसे गैर निष्पादनीय सम्पति घोषित किया
जायें।
मौद्रिक एवं साख नीति मे सुधार -
वरिष्ठ नागरिकता की श्रेणी मे आने वाले वृद्धों के लिये जमा योजनायंे प्रस्तावित है। एक मुश्त
समयावधि जमाओ पर अधिक ब्याज दर श्रेणी तक एक लाख रूपये से अधिक की जमा राशि पर ही दी जाती
थी, लेकिन नीति मे ब्याज दरो पर वृद्धजनों से स्थायी जमा लेने तथा मृत्यु होने पर ;छवउपदमम ।ध्बद्ध के
खाते में जमा करवाये जाने की घोषणा की। प्रत्याभूति संविदा अधिनियम 1956 मे आवश्यक परिवर्तन करके
भारतीय वितीय बाजार मे सेबी एंव रिजर्व बैक की नियामक भूमिका को पृथक किया गया।
पेशन भुगतान नीति में सुधार-
क्वूदसवंक डवतम ब्वदजंदज टपेपज रू ूूूण्तचेबहनतनण्पद
क्वूदसवंक डवतम ब्वदजंदज टपेपज रू ूूूण्तचेबहनतनण्पद
सार्वजनिक व्यय एवं देनदारियो पर ब्याज के भुगतान के बाद पेंशन दायित्वों का भुगतान एक भावी
कठिन चुनौती बनता जा रहा है इसलिये सरकार ने निर्णय किया है कि पंेशन एवं अन्य भत्तो की क्षतिपूर्ति नयी
नियुक्तियों पर रोक लगाकर तथा अनावश्यक खाली पडे़ पदो को समाप्त करके की जायेगी।
एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया ताकि मांचू पेंशन व्यवस्था का जांचा जा सके।
सार्वजनिक व्यय प्रबन्ध-
सार्वजनिक व्याय के माध्यम ने अधिकतम सामाजिक कल्याण करना, सरकारों का महत्पूर्ण कार्य आज
भी माना जाना चाहिये। सार्वजनिक व्यय का प्रबन्ध एवं संसाधनो मे वृद्धि करारोपण द्वारा नही की जा सकती
अपितु व्यय नियंत्रण एवं ऋणों के बोझ को हल्का करके किया जा सकता है। सरकारी विभागो में कर्मचारियो
की संख्या एवं योजना के अनुसार व्यय एवं बजट आवटंन करना -जीरो बेस बजटिंग।
आर्थिक नीतियां -
1. कृषि नीति-
2. जनंसख्या नीति-
3. ज्तंदेचवतज एवं दूरसंचार नीति
4. च्तपबम च्वसपबल

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